ओम साईं
रामसाईं अपने हाथ की हमें कठ्पुतली बना
लोजैसे चाहे डोर खींचो,
जैसे चाहे नचा लो सब कुछ अर्पण करने की अपनी,
पूरी है तैयारीदास बनाओ या काठ बनाओ, मरज़ी है
तुम्हारीऔर नहीं तो साईं देवा,
बस इतना ही कर दो सांस सांस से साईं सिमरें,
बस इतना ही वर दो दे सको तो आशिश दे दो हमको,
हे साईं अभिराम साईं साईं रटते रटते हो जीवन की शाम कृपा दृष्टि जो मिल जाये तेरी,
साईं करुणा प्रेरेतुम में आन मिलें और छूटें जन्म मरण के फेरे
जय साईं राम साईं सेविका जय सांई राम़।।।
रुलाने वाले को भी हसाने का हुन्नर सिखा दोऔर जिसे रुला गये हैं
उसे भी हंसाओ यारोकौन कहता है कि
आसमां मे छेद नही हो सकताएक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो।
नज़रों को ज़मी से उठा कर आसमां पर लगाओकर लो इरादा
और आसमा को भी झुकाओ यारोएक बार फिर
हुक्म दो हवा कोआवाज़ अपनी इस जंहा को सुनाओ
यारोपत्थर तो सभी फेंक सकते
हैंतुम पत्थरों में भी फूल खिलाओ यारोबरसाने दो
सूरज को अपनी आग, बस मुस्कराओऔर
आग को भी ठन्डी चाँदनी बनाओ यारो।
करो शुरुआत कुछ नये बीज बोने कीकरो हिफाज़त और
उस बीज को एक पेड़ बनाओ
यारोउसकी छाया हो हर अपने और पराये के लियेना भूले ज़माना
एक ऐसी मिसाल बनाओ यारोचार दिन की है
ज़िन्दगी इसे यूँ मत उड़ाओएक दिन खेलो
दूसरे दिन संभलो तैयार होतीसरे दिन बनाओ अपनी
राह और मुकाम को पाओचौथे दिन मनाओ खुशियां
फिर हंसते हंसते जाओऔर जब जाओ तो एक आंसू सब की आंख में दे जाओ यारो।
कौन कहता है कि आसमां में छेद नही हो सकताएक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो
चुपी भी मोहब्बत की ज़ुबान होती
हैप्यार की सच्चाई निगाहों से भी बयान होती है।
'महबूब' ना आये तो चुभन सी होती है
दिल मेंउसके आने से हर तम्मना दिल की जवान होती है...
सब तकदीरों का खेल है यारोहर किसी पे कहां ये मोहब्बत,
मेहरबान होती...मिलना बिछड़ना तो खेल है तकदीर काजला
जो मैं दर्द-ए-मोहब्बत में तो हर तम्मना दिल में धुंआ होती है...
अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना
सांई राम।।।
शनिवार, 13 दिसंबर 2008
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