शनिवार, 13 दिसंबर 2008

ॐ सांई राम

ॐ सांई राम~~~वो आए रूके कुछ पल ,
झाका और चल दिए,मैं दौङी पीछे पकङा हाथ,
और हैरानी से पूछा कहां चल दिएवो बोले बङे दुखी मन से ...
अरे पगलीतुने की थी पुकारा तो में दौङा चला आया,
पर लगा जब अंदर आने,तो देखा
मैने कि भीङ है लगी हुई सभी ने है डेरा जमाया,
मैं बैठू कहां ये बता मुझकोक्या है
तेरे मन में मेरा ठिकानातू जब पुकारें मुझे
मैं दौङा चला आता हूँपर तू तो ये भी ना जाने कि है
मुझे कहां बिठानाइस भीङ कि कुछ कम कर कर साफ मेरी जगह कोफिर बुला
मुझे फिर देख कभी ना होगा वापस जानामैं हो गए शर्मिदां
इस सच को जान कर कि मैने की पुकार वो आ भी गएपर
कभी नहीं सोचा कि है उन्हे कहाँ बिठाना!!!!
बरसों से खडे हैं हमराह पर
'उनके' इन्तजार मेंउम्मीद है
'वह' कभी आएंगेहमारा काम है इन्तजार करनातय
'उनको' करना है
किकब हमारे यहां आयेंगे

आओ ऐसा इक जंहाँ बनाऐं
जंहा भी जायें, खुशियाँ ही पाऐं!
ना दर्द का अहसास हो,
बस प्यार ही प्यार होफूल कभी ना मुरझायें,
न ही कभी पतझड़ आयेंहर जगह बहारें ही छायें...
आओ ऐसा इक जंहाँ बनायें!ख्वाब सभी के पूरे होंजो पूरे हो,
वो अधूरे होंग़म के बादल कभी ना छायेंप्यार की बारिश बरसती जायें....
आओ ऐसा इक जंहाँ बनायें!कोई कभी ना आंसू बहायेजिसे भी वो चाहे, '
उसका ही' वो हो जायेदूर कभी ना वो जायेजंहा भी जाये, हमेशा साथ '
उसका ही' पायें....आओ ऐसा इक जंहा बनायें!

कठपुतली की तरह बस नाचे जा रही हूँ,

किसी ने धागे से जिधर खीचां बस वही चल दी,

बिना कुछ सोचे बस ठुमके लगा रही हूँ,

मेरी आत्मा कोसती मुझको धिक्कार दे रही,

तू है जिन्दा इंसान,तुझमे भी दिल है,

क्या यूँ ही जन्म गवाएगीन सोचे गी कुछ बस धागों पर नाचती जाएगी,

परमेश्वर की संतान है तूउस ईश्वर का अभिमान है तू,

न की सिर्फ काठ की पुतली,जो सिर्फ नाचे जाती है,

मन को कर ले काबू में, तोङ के सारे धागों कोरख ले अपने हाथों में,

सौपं दे उसको अपना हर सांस, जो भी बाकी बचा हुआ,

फिर देख इस जीने में क्या है मज़ा,

सौपं दे सारे धागें उसको जो असली तेरा रचयिता है~~~

अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

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